कानपुर शेल्टर होमः प्रशासन देता ध्यान तो कोरोना से बच जाती कई लड़कियां

  • कानपुर शेल्टर होम में बड़ी लापरवाही उजागर
  • अब इमारत सील कर संवासनियों को अस्पताल भेजा

कानपुर शेल्टर होम में संवासनियों के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद शासन-प्रशासन सकते में है. इस पूरे मामले में बड़ी प्रशासनिक लापरवाही उजागार हुई है. इस पूरे मामले में आजतक / इंडिया टुडे की जांच से चौंकाने वाला खुलासा हुआ है, जिसमें साफ पता चला कि जिला प्रशासन की लापरवाही के चलते कानपुर में सरकार द्वारा संचालित आश्रय गृह में COVID-19 संक्रमण फैल गया.

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15 जून 2020

राजकीय शेल्टर होम में रहने वाली एक लड़की का टेस्ट किया गया था. जिसकी रिपोर्ट उस दिन COVID 19 पॉजिटिव आई.

17 जून 2020

उस रात को 33 अन्य संवासनियों की जांच रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव पाई गई. लेकिन शेल्टर होम प्रशासन और कर्मचारियों ने लापरवाही दिखाते हुए उन लड़कियों को तुरंत अलग नहीं किया.

19 जून 2020

उस दिन शेल्टर होम में 16 और संवासनियों की टेस्ट रिपोर्ट में कोरोना वायरस पॉजिटिव पाया गया. जिसके बाद प्रशासन की नींद खुली. शेल्टर होम की इमारत को सील कर दिया गया. और जिन संवासनियों की रिपोर्ट नेगेटिव आई थी, उन सभी क्वारनटीन सेंटर में स्थानांतरित कर दिया गया.

20 जून 2020

उस दिन फिर से जो टेस्ट रिपोर्ट आई, उसमें 8 लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई. इसके बाद शेल्टर होम के 1 कर्मचारी सहित सभी 58 पॉजिटिव संवासनियों को विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया है.

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प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब वहां पहला पॉजिटिव केस सामने आया था तो प्रशासन ने शेल्टर होम की इमारत को सील क्यों नहीं किया? और पहला मामला सामने आने के बाद ही दूसरी लड़कियों को पॉजिटिव लड़की से अलग क्यों नहीं किया गया?

इस पूरे मामले में हैरानी की बात ये है कि 17 जून को अधिकतम 33 मामले सामने आने के बाद भी प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया. प्रशासन ने स्वीकार किया है कि COVID-19 के प्रकोप के दौरान जब सोशल डिस्टेंसिंग बहुत ज़रूरी है. ऐसे में 100 लोगों की क्षमता वाले शेल्टर होम में 171 लड़कियों को रखा गया था. अब देखना है कि इस लापरवाही पर सरकार क्या रुख अपनाएगी?

बता दें कि कानपुर शेल्टर होम में एक साथ इतने मामले आने से लखनऊ-दिल्ली तक सियासी पारा चढ़ा हुआ है. सरकार-प्रशासन घेरे में है. विपक्ष सवाल दाग रहा है. सवाल तो नाबालिग लड़कियां के गर्भवती होने पर भी है. लेकिन अभी इस तरफ शासन-प्रशासन चुप्पी साधे हुए है.

Source – Aaj Tak